Green Energy: भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है और अब इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। ओडिशा में ऐसा शोध केंद्र बनने जा रहा है जो देश को ग्रीन हाइड्रोजन के भविष्य की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस पहल में उद्योग, सरकार और शिक्षा जगत एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में नई तकनीकों और ऊर्जा समाधान का रास्ता और मजबूत होगा।
Green Energy: ग्रीन हाइड्रोजन के लिए बनेगा आधुनिक Centre of Excellence

अवादा ग्रुप ने GRIDCO और IIT भुवनेश्वर के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत ओडिशा में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ा एक अत्याधुनिक Centre of Excellence स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र ऊर्जा भंडारण, उद्योगों में हाइड्रोजन के इस्तेमाल और भविष्य की मोबिलिटी समाधानों पर काम करेगा। खास बात यह है कि यहां तकनीक की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी शोध होगा, जिससे इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो सके।
यह केंद्र न सिर्फ शोध करेगा बल्कि नई पीढ़ी के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के लिए सीखने का बड़ा अवसर भी बनेगा। अवादा ग्रुप अपनी ओडिशा यूनिट में इस CoE का एक विशेष विस्तार केंद्र भी बनाएगा, जहां अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीम मौजूद होगी। इसका सीधा लाभ भारत के नवीकरणीय ऊर्जा इकोसिस्टम को मिलेगा और ओडिशा ग्रीन टेक्नोलॉजी का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
Green Energy: प्रशासन और शिक्षा जगत का मजबूत सहयोग
इस परियोजना में GRIDCO एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह संस्थान केंद्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और ओडिशा सरकार के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन और फंडिंग पर काम करेगा। वहीं IIT भुवनेश्वर इस पूरे प्रोजेक्ट का शैक्षणिक और तकनीकी आधार बनेगा, जहां भूमि, रिसर्च सुविधा और संस्थागत सहयोग दिया जाएगा। ओडिशा सरकार के ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी करेंगे।

अवादा ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि यह साझेदारी भारत की क्लीन एनर्जी यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है और इससे नेट-ज़ीरो भविष्य के सपने को हकीकत में बदलने की राह और तेज होगी।
FAQs
प्रश्न: Centre of Excellence का मुख्य उद्देश्य क्या होगा?
उत्तर: ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग, तकनीक और उसकी आर्थिक व्यवहार्यता पर शोध और नवाचार करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
प्रश्न: इस प्रोजेक्ट में कौन-कौन शामिल हैं?
उत्तर: अवादा ग्रुप, GRIDCO और IIT भुवनेश्वर इस परियोजना के मुख्य साझेदार हैं।
प्रश्न: इसका सबसे बड़ा लाभ किसे मिलेगा?
उत्तर: भारत की स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को मजबूती मिलेगी और ओडिशा एक प्रमुख नवीकरणीय तकनीक हब के रूप में विकसित होगा।
Disclaimer: यह सामग्री उपलब्ध जानकारी के रचनात्मक पुनर्लेखन पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को सूचित करना है।
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